BNS धारा 68: प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 5: महिला और बालक के विरुद्ध अपराधों के विषय में
पहले IPC 376C थी। IPC → BNS खोजें
अन्य भाषाओं में भी: English
68. जो कोई,--
(क) प्राधिकार की किसी स्थिति या वैश्वासिक संबंध रखते हुए ; या
(ख) कोई लोक सेवक होते हुए ; या
(ग) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी जेल, प्रतिप्रेषण-गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान का या महिलाओं या बालकों की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबंधक होते हुए ; या
(घ) अस्पताल के प्रबंधतंत्र या किसी अस्पताल का कर्मचारिवृंद होते हुए, ऐसी किसी महिला को, जो उसकी अभिरक्षा में है या उसके भारसाधन के अधीन है या परिसर में उपस्थित है, अपने साथ मैथुन करने हेतु, जो बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, उत्प्रेरित या विलुब्ध करने के लिए ऐसी स्थिति या वैश्वासिक संबंध का दुरुपयोग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
स्पष्टीकरण 1 --इस धारा में, 'मैथुन" से धारा 63 के खंड (क) से खंड (घ) में वर्णित कोई कृत्य अभिप्रेत होगा ।
स्पष्टीकरण 2--इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 63 का स्पष्टीकरण 1 भी लागू होगा ।
स्पष्टीकरण 3--किसी जेल, प्रतिप्रेषण-गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान या महिलाओं या बालकों की किसी संस्था के संबंध में, "अधीक्षक" के अंतर्गत कोई ऐसा व्यक्ति है, जो जेल, प्रतिप्रेषण-गृह, स्थान या संस्था में ऐसा कोई पद धारण करता है, जिसके आधार पर वह उसके निवासियों पर किसी प्राधिकार या नियंत्रण का प्रयोग कर सकता है ।
स्पष्टीकरण 4--"अस्पताल” और "महिलाओं या बालकों की संस्था" पदों का क्रमशः वही अर्थ होगा, जो धारा 64 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण के खंड (ख) और खंड (घ) में उनका है ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 63. बलात्संग
- 64. बलात्संग के लिए दंड
- 65. कतिपय मामलों मैं बलात्संग के लिए दंड
- 66. पीड़िता की मृत्यु या सतत् विकृतशील दशा कारित करने के लिए दंड
- 67. पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ पृथक्करण के दौरान मैथुन
- 69. प्रवंचनापूर्ण साधनों, आदि का प्रयोग करके मैथुन
- 70. सामूहिक बलात्संग
- 71. पुनरावृतिकर्ता अपराधियों के लिए दंड
- 72. कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
- 73. अनुज्ञा के बिना न्यायालय की कार्यवाहियों से संबंधित किसी मामले का मुद्रण या प्रकाशन करना
- 74. महिला की ल्ज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 75. लैंगिक उत्पीड़न
- 76. विवस्त्र करने के आशय से महिला पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 77. दृश्यरतिकता
- 78. पीछा करना
- 79. शब्द, अंगविक्षेप या कार्य, जो किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है
- 80. दहैज मृत्यु
- 81. विधिपूर्ण विवाह का प्रवंचना से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास
- 82. पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना
- 83. विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना
- 84. विवाहित महिला को आपराधिक आशय से फ़ुसलाकर ले जाना, या ले जाना या निरुद्ध रखना
- 85. किसी महिला के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना
- 86. क्रूरता की परिभाषा
- 87. विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी महिला को व्यपह्त करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना
- 88. गर्भपात कारित करना
- 89. महिला की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना
- 90. गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मृत्यु
- 91. बालक का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य
- 92. ऐसे कार्य द्वारा जो आपराधिक मानव वध की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात बालक की मृत्यु कारित करना
- 93. बालक के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के बालक का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग
- 94. मृत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना
- 95. अपराध को कारित करने के लिए बालक को भाडे पर लेना, नियोजित करना या नियुक्त करना
- 96. बालक का उपापन
- 97. दस वर्ष से कम आयु के बालक के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
- 98. वैश्यावृत्ति आदि के प्रयोजन के लिए बालक को बेचना
- 99. वैश्यावृत्ति आदि के प्रयोजनों के लिए बालक को खरीदना