आपराधिक षडयंत्र के विषय में

BNS धारा 61: आपराधिक षड़यंत्र

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 4: दुष्प्रेरण, आपराधिक षड़यंत्र और प्रयास के विषय में

पहले IPC 120A, IPC 120B थी। IPC → BNS खोजें

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61. (1) जब दो या अधिक व्यक्ति--
(क) कोई अवैध कार्य ; या

(ख) कोई ऐसा कार्य, जो अवैध नहीं है, अवैध साधनों द्वारा, करने या करवाने के लिए सामान्य उद्देश्य के साथ सहमत होते हैं, तब ऐसी सहमति आपराधिक षड़यंत्र कहलाती है

परंतु किसी अपराध को करने की सहमति के सिवाय कोई सहमति आपराधिक षडयंत्र तब तक न होगी, जब तक कि सहमति के अलावा कोई कार्य उसके अनुसरण में उस सहमति के एक या अधिक पक्षकारों द्वारा नहीं कर दिया जाता ।

स्पष्टीकरण--यह तत्वहीन है कि अवैध कार्य ऐसी सहमति का चरम उद्देश्य है या उस उद्देश्य का आनुषंगिक मात्र है ।

(2) जो कोई

(क) मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने के आपराधिक घडयंत्र में शरीक होगा, यदि ऐसे षड़यंत्र के दंड के लिए इस संहिता में कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है, तो वह उसी प्रकार दंडित किया जाएगा, मानो उसने ऐसे अपराध का दुष्प्रेरण किया था ;

(ख) पूर्वॉक्त रूप से दंडनीय अपराध को करने के आपराधिक षड़यंत्र से भिन्न किसी आपराधिक षड्॒यंत्र में शरीक होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से अधिक की नहीं होगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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