BNS धारा 49: दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 4: दुष्प्रेरण, आपराधिक षड़यंत्र और प्रयास के विषय में

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49. जो कोई किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित कार्य दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाता है, और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए इस संहिता द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है, तो वह उस दण्ड से दण्डित किया जाएगा, जौ उस अपराध के लिए उपबन्धित है ।

स्पष्टीकरण--कोई कार्य या अपराध दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया तब कहा जाता है, जब वह उस उकसाहट के परिणामस्वरूप या उस षडयंत्र के अनुसरण में या उस सहायता से किया जाता है, जिससे दुष्प्रेरण गठित होता है ।

दृष्टान्त

(क) ख को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए क उकसाता है । ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप, वह अपराध करता है । क उस अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है, और उसी दण्ड से दण्डनीय है जिससे ख है ।

(ख) य को विष देने का पड़यंत्र क और ख रचते हैं । क उस चडयंत्र के अनुसरण में विष उपाप्त करता है और उसे ख को इसलिए परिदत करता है कि वह उसे य को दे । ख॑ उस षड़यंत्र के अनुसरण में वह विष क की अनुपस्थिति में य को देता है और उसके द्वारा य की मृत्यु कारित कर देता है । यहां, ख हत्या का दोषी है । क षडयंत्र द्वारा उस अपराध के दुष्प्ररण का दोषी है, और वह हत्या के लिए दण्ड से दण्डनीय है ।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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