BNS धारा 203: लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से संपत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 12: लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराधों के विषय में
पहले IPC 169 थी। IPC → BNS खोजें
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203. जो कोई, लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते, इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए कि वह कतिपय संपत्ति को न तो क्रय करे और न उसके लिए बोली लगाए, या तो अपने नाम में, या किसी दूसरे के नाम में, या दूसरों के साथ संयुक्त रूप से, या अंशों में उस संपत्ति को क्रय करता है, या उसके लिए बोली लगाता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, और यदि वह संपत्ति क्रय कर ली गई है, तो वह अधिहत कर ली जाएगी ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 198. लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करता है
- 199. लोक सेवक, जो विधि के अधीन निदेश की अवज्ञा करता है
- 200. पीड़ित का उपचार न करने के लिए दंड
- 201. लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है
- 202. लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में ्रगा है
- 204. लोक सेवक का प्रतिरूपण
- 205. कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या टोकन को धारण करना