व्यपहरण, अपहरण, दासत्व और बलात्श्रम के विषय में

BNS धारा 137: व्यपहरण

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 6: मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषयों में

पहले IPC 359, IPC 360, IPC 361, IPC 363 थी। IPC → BNS खोजें

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137.
(1) व्यपहरण दो किस्म का होता है ; भारत में से व्यपहरण और विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण--

(क) जो कोई किसी व्यक्ति का उस व्यक्ति की, या उस व्यक्ति की ओर से सम्मति देने के लिए वैध रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति की सम्मति के बिना, भारत की सीमाओं से परे प्रवहण कर देता है, वह भारत में से उस व्यक्ति का व्यपहरण करता है, यह कहा जाता है ।

(ख) जो कोई किसी बालक को या किसी विकृत चित व्यक्ति को, ऐसे बालक या विकृत चित्त व्यक्ति के विधिपूर्ण संरक्षक की संरक्षकता में से ऐसे संरक्षक की सम्मति के बिना ले जाता है या बहका ले जाता है, वह ऐसे बालक या ऐसे व्यक्ति का विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण करता है, यह कहा जाता है ।

स्पष्टीकरण--इस खंड में "विधिपूर्ण सरंक्षक" शब्दों के अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति आता है, जिस पर ऐसे बालक या अन्य व्यक्ति की देखरेख या अभिरक्षा का आर विधिपूर्वक न्यस्त किया गया है ।

अपवाद--इस खंड का विस्तार किसी ऐसे व्यक्ति कै कार्य पर नहीं है, जिसे सदभावपूर्वक यह विश्वास है कि वह किसी अधर्मज बालक का पिता है, या जिसे सदभावपूर्वक यह विश्वास है कि वह ऐसे बालक की विधियूर्ण अभिरक्षा का हकदार है, जब तक कि ऐसा कार्य दुराचारिक या विधिविरुद्ध प्रयोजन के लिए न किया. जाए ।

(2) जो कोई भारत में से या विधिपूर्ण संरक्षकता में से किसी व्यक्ति का व्यपहरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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