BNS धारा 107: बालक या विकृत चित्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 6: मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषयों में

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107. यदि कोई बालक, विकृत चित व्यक्ति, मत्तता की अवस्था में कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है जो कोई ऐसी आत्महत्या को करने के लिए दुष्प्रेरण करेगा, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास या ऐसी अवधि के कारावास से, जो दस वर्ष से अधिक की नहीं होगी, दंडनीय होगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा ।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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