BNSS धारा 418: सजा के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा अपील

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 31: अपील

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418. (1) उप-धारा (2) में अन्यथा प्रदान किए गए को छोड़कर, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के अलावा किसी भी न्यायालय द्वारा आयोजित मुकदमे में सजा के किसी भी मामले में, लोक अभियोजक को इसके खिलाफ अपील पेश करने का निर्देश दे सकती है। इसकी अपर्याप्तता के आधार पर सज़ा—
(ए) सत्र न्यायालय में, यदि सजा मजिस्ट्रेट द्वारा पारित की जाती है; और
(बी) उच्च न्यायालय को, यदि सजा किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित की जाती है।
(2) यदि ऐसी सजा ऐसे मामले में है जिसमें अपराध की जांच इस संहिता के अलावा किसी भी केंद्रीय अधिनियम के तहत अपराध की जांच करने के लिए सशक्त किसी एजेंसी द्वारा की गई है, तो केंद्र सरकार लोक अभियोजक को इसके खिलाफ अपील पेश करने का भी निर्देश दे सकती है। इसकी अपर्याप्तता के आधार पर सजा—
(ए) सत्र न्यायालय में, यदि सजा मजिस्ट्रेट द्वारा पारित की जाती है; और
(बी) उच्च न्यायालय को, यदि सजा किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित की जाती है।
(3) जब अपर्याप्तता के आधार पर सजा के खिलाफ अपील दायर की गई है, तो सत्र न्यायालय या, जैसा भी मामला हो, उच्च न्यायालय अभियुक्त को दिखाने का उचित अवसर देने के अलावा सजा नहीं बढ़ाएगा। इस तरह की बढ़ोतरी के खिलाफ कारण बताएं और कारण बताते हुए, आरोपी अपने बरी होने या सजा कम करने की गुहार लगा सकता है।
(4) जब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 71 के तहत पारित सजा के खिलाफ अपील दायर की गई है, तो अपील का निपटारा एक सीमा के भीतर किया जाएगा। ऐसी अपील दायर करने की तारीख से छह महीने की अवधि।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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